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Saturday, 17 January 2015

किरण बेदी बन सकती हैं दिल्ली की मुख्यमंत्री


किरण बेदी जनता को संवोधित करते हुए 

(फोटो: By Leetza T (Own work) [CC BY-SA 4.0 (http://creativecommons.org/licenses/by-sa/4.0)], via Wikimedia Commons)
भारतीय पुलिस सेवा की पूर्व अधिकारी किरण बेदी बन सकती हैं दिल्ली की मुख्यमंत्री! किरण बेदी अपनी स्वच्छ छबि एवं प्रशासनिक दक्षता के लिए जानी जाती हैं. अभी दो दिन पूर्व ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है. दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह एवं केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के समक्ष औपचारिक रूप से उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की.

किरण वेदी नरेंद्र मोदी की प्रशंसक रहीं हैं. भारतीय पुलिस सेवा से स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति के बाद वो सामाजिक सेवा से जुड़ गई थीं एवं लोकपाल आंदोलन में अन्ना हज़ारे की विश्वस्त सहयोगी रहीं। जब अरविन्द केजरीवाल ने अन्ना का साथ छोड़ अपनी पार्टी बनाई तब भी वे पूरी निष्ठां के साथ अन्ना आंदोलन से जुडी रहीं थी.

किरण बेदी को दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है एवं वे भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने पर दिल्ली की संभावित मुख्यमंत्री भी हैं. उनके शुरूआती भाषणो में ही उनका ये रूप स्पष्ट झलक रहा है. वे दिल्ली की सभी ७० विधानसभा सीटों को संवोधित करेंगी एवं प्रतिदिन ५-७ सभाएं करेंगी।

अबतक हुए सभी सर्वेक्षणों से स्पष्ट रूप से यह सामने आ रहा है की दिल्ली की जनता का रुझान भाजपा की और है और भाजपा दिल्ली में स्पष्ट बहुमत की सरकार बनाने जा रही है. नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखण्ड में चुनाव जीत कर अपनी सरकार बनाई है एवं जम्मू एवं कश्मीर में अबतक की सर्वाधिक सीटें प्राप्त की है.

७ फरबरी को दिल्ली में होनेवाले विधानसभा चुनाव में भी भाजपा जीत के परचम फहराने जा रही है और सम्भावना है की दिल्ली को किरण बेदी के रूप में एक ईमानदार एवं सक्षम मुख्यमंत्री मिलने जा रहा है. किरण बेदी ने अपने इरादे जाहिर करते हुए दिल्ली को विश्व स्तरीय शहर बनाने का वादा किया है. हम दिल्ली विधानसभा चुनाव में उनके एवं भारतीय जनता पार्टी की सफलता की शुभकामना करते हैं.

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योजना आयोग बना नीति आयोग

श्रमेव जयते और श्रम कानूनों में सुधार की आवश्यकता

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Sunday, 4 January 2015

धर्म, पंथ, धर्मान्तरण एवं कानून


परमात्मा की उपासना करते हुए भक्त  

पूजन सामग्री 
प्रभु पूजा में सन्मिलित साध्वियां 
इन दिनों धर्मान्तरण को लेकर काफी विवाद चल रहा है. लगभग सभी टी वी चैनलों में इस विवाद को प्रमुखता से दिखाया जा रहा है. इस विवाद को समझने के लिए पहले यह समझना जरूरी है की धर्म क्या है एवं पंथ क्या है?   

वास्तविक धर्म मनुष्य को जीवन जीने की कला सिखाता है एवं उसके चारित्रिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है. यह मनुष्य को गलत आदतों से बचाता है. धर्म सर्वजन हिताय  सर्वजन सुखाय की भावना से ओतप्रोत है. यह मनुष्य को पाप अर्थात गलत कार्यों से बचत है एवं पुण्य अर्थात अच्छी बातों अच्छे कर्मों के लिए प्रेरित करता है. यह मनुष्य में आध्यात्मिकता का वीजारोपण कर उसे चित्त शुद्धि के मार्ग पर ले जाता है. धर्म का अंतिम फल मोक्ष माना गया है जहाँ जीव सर्व विकार रहित होता है.

धर्म का आचरण करते समय उसके विविध पहलु होते हैं  जो की देश, काल परिश्थितियों के अनुसार बदलते रहते हैं परन्तु मुलभुत तत्व नहीं बदलता है. समय समय पर महापुरुषों ने धर्म का स्वयं आचरण करते हुए लोगों को उसी मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी है. प्रायः कर इसी से विभिन्न पंथों का उदय हुआ. सभी ऐसे पंथ मूल रूप से उसी धर्म के आचरण की प्रेरणा देते हैं. कालांतर में यहीं पंथ धर्म के रूप में जाना जाने लगते हैं. हर पंथ की अपनि उपासना पद्धति होती है एवं लोग उसी पद्धति से उपासना करते हैं.

यहाँ तक कोई दिक्कत नहीं है परन्तु कभी कभी अपने अपने पंथ की कट्टरता लोगों को उन्मादी बना देती है एवं वे अन्य पंथों से द्वेष करने लगते हैं. यहीं से हिंसा प्रारम्भ होती है. एक पंथ के अनुयायियों को जबरन अपने पंथ में लेन की कुचेष्टा से वातावरण विषाक्त होता है. इसे धर्मान्तरण की संज्ञा दी जाती है परन्तु यह धर्मान्तरण नहीं पथांतरण मात्र है.

मनुष्य अपनी इच्छा से अथवा जन्म से किसी एक पंथ में विश्वास कर उस मार्ग का अनुसरण करता है. कभी कभी वह अन्य पंथ की अच्छी वातों से आकृष्ट हो कर अपना मत बदल कर नए पंथ को स्वीकार करता है इसे धर्मान्तरण का नाम दिया जाता है एवं यह धर्मान्तरण की स्वस्थ्य, स्वच्छ एवं मान्य परंपरा है. इसमें किसी को कोई विरोध नहीं होना चाहिए।

परन्तु किसी को लोभ-लालच दे कर, भय दिखा कर, बरगला कर या जबरदस्ती कर उसका पथांतरण (धर्मान्तरण) करना सभ्य समाज मे स्वीकृत नहीं हो सकता।  अतः धर्मान्तरण पर रोक लगाने वाले कानून लेन के प्रयास की सराहना होनी चाहिए एवं इसे लेन में सभी को सहयोग करना चाहिए. केंद्र सरकार एवं भाजपा ने इस और कदम बढ़ाया है इस पर व्यापक राष्ट्रिय सहमति बन्नी चाहिए।


Jyoti Kothari

Convener, Jaipur division
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Narendra Modi Vichar Manch

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Monday, 13 October 2014

महाराष्ट्र चुनाव - उद्धव ठाकरे घुटने के वल झुके


नरेंद्र मोदी विशाल जनसभा को सम्वोधन करते हुए 
(By Narendra Modi [CC-BY-SA-2.0 (http://creativecommons.org/licenses/by-sa/2.0)], via Wikimedia Commons)

आज महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव प्रचार के अंतिम दिन मुंबई में  शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अपने पुत्र आदित्य के साथ मतदाताओं के आगे घुटने के वल झुके। हमेशा अकड़ कर रहनेवाले उद्धव ठाकरे को इस प्रकार सामान्य  सामने झुकते देख कर अच्छा लगा और लगा की भारत में सही मायने में लोकतंत्र आ गया है.

अंदर की बात ये है की प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्मे एवं मेहनत के आगे उन्हें अपनी जमीन खिसकती नज़र आ रही है. कुछ उपचुनावों में भारतीय जनता पार्टी की हर के कारण मोदी जी के करिश्मे को काम आंकने की भूल जो कर बैठे थे. इस चनाव में अपनी हठधर्मिता के कारण वर्तमान शिवसेना प्रमुख ने अपने पिता बालासाहेब ठाकरे द्वारा BJP के साथ बनाये गठवन्धन को तोड़ने में संकोच नहीं किया।

२५ साल पुरानी मैत्री टूटने के बाद भी हमारे लोकप्रिय नेता नरेंद्र मोदी ने शिवसेना के खिलाफ एक भी शब्द नहीं बोलने का बड़प्पन दिखाया जबकि उद्धव ठाकरे ने मित्र दल के लिए अनाप शनाप शब्दों का इस्तेमाल किया एवं पार्टी के मुखपत्र सामना में कई अनर्गल लेख लिख डाले। लेकिन मोदीजी की सभा में आनेवाली भीड़ एवं सर्वे के रिज़ल्ट ने उन्हें चौंका दिया। हर बीते दिन के साथ महाराष्ट्र की जनता अधिकाधिक BJP की तरफ होती दिख रही है. इस विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी अकेले दम पर बहुमत लाती हुई दिख रही है.

मोदीजी ने अपनी अत्यधिक व्यस्तता एवं प्रधान मंत्री पद के दायित्व के बाबजूद अकेले महाराष्ट्र में २७ रैलियां कर डाली।  अब उद्धवजी के पास जनता के आगे सपुत्र घुटने टेक कर सज़दा करने के अलावा कोई चारा भी तो नहीं बचा!!

लगता है कॉंग्रेस् ने महाराष्ट्र के सात हरियाणा में भी अपने लिए उम्मीद छोड़ दी है. कांग्रेस अध्यक्ष  सोनिया  गांधी ने  महाराष्ट्र में मात्र ४ एवं हरियाणा में ३ जनसभा को संवोधित किया जबकि उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने क्रमशः ६ एवं ४ रैलियां की. मोदीजी ने महारष्ट्र के २७ के साथ हरियाणा में भी ११ जनसभाओं को संवोधित कर प्रचार में कांग्रेस से बहुत आगे निकल गए. BJP अध्यक्ष एवं मोदीजी के घनिष्ठ सहयोगी अमित शाह ने तो ५० से भी अधिक रैलियां कर दोनों ही प्रदेशों में भाजपा की जड़ें मज़बूत की है.


पाकिस्तान की नापाक हरक़त एवं पाक अधिकृत कश्मीर

Jyoti Kothari
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Narendra Modi Vichar Manch


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