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Thursday, 23 May 2019

दो जाति, गरीब और ग़रीबी मिटानेवाली- नरेंद्र मोदी विजय सन्देश

दो जाति, गरीब और ग़रीबी मिटानेवाली 


आदरणीय श्री नरेंद्र भाई मोदी के नेतृत्व में एवं श्री अमित शाह जी के सफल चुनाव प्रवंधन से आज भारतीय जनता पार्टी एवं NDA को लोकसभा चुनाव २०१९ में जो प्रचंड बहुमत मिला है उसके लिए सभी को हार्दिक बधाई. अपने विजय सन्देश में श्री नरेंद्र मोदी ने आज एक बहुत ही विशेष बात कही, भारत में दो ही जाती है- एक गरीब और एक गरीबी मिटानेवाली. की मैं गरीबी मिटानेवाली जाती से हूँ, और आज के इस विजय दिवस में मैं संकल्प लेता हूँ की देश से गरीबी मिटने में मैं मेरा पूरा योगदान दूंगा.

नरेंद्र मोदी 
नरेंद्र मोदी जी के आह्वान पर देश ने समय समय पर अनेक संकल्प लिए और उसपर काम कर देश को आगे बढ़ने का काम किया. स्वच्छ भारत अभियान हो, गैस सब्सिडी छोड़ने का मामला हो या और कुछ. उसी तरह आज हम सबको यह संकल्प लेना है की गरीबी मिटने वाली जाती में सम्मिलित हो कर देश से गरीबी को उखाड़ फेंकना है .

सन १९७१ में स्वर्गीय इंदिरा गाँधी ने गरीबी हटाओ का नारा दिया था, उसके बाद ४८ वर्ष बीत चुके हैं पर गरीबी न हटी न मिटी. ४८ वर्षों में काम नहीं हुआ क्योंको न नीति थी न नीयत. अब इस काम को ४८ महीने में पूरा कर दिखाना है. कृपया ध्यान रखें, यदि हम सब ईमानदारी से प्रयास करें तो आज से ठीक ४८ महीने बाद अर्थात २३ मई, २०१३ तक भारत देश में एक भी गरीब नहीं रहेगा. देश से गरीबी हमेशा हमेशा के लिए दूर हो जाएगी.

आप सभी से फिर से प्रार्थना है की गरीबी मिटानेवाली जाती में सम्मिलित होने का संकल्प करें और २०२३ तक देश से गरीबी को समाप्त करें.

सादर,
संयोजक, जयपुर संभाग,
प्रभारी, पश्चिम बंगाल,

Monday, 26 December 2016

मोदी पर राहुल के आरोप, शीला दीक्षित ने नकारा




नरेंद्र मोदी पर पिछले कुछ दिनों से राहुल गाँधी रिश्वतखोरी के झूठे और अनर्गल आरोप लगा रहे हैं. परंतु उन्ही की कोंग्रेस पार्टी की वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित ने उसे नकार दिया है. शीला दीक्षित दिल्ली की तीन बार मुख्यमंत्री रह चुकीं हैं और अभी कोंग्रेस की और से उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार हैं.

Sheila Dikshit denies rahul gandhi allegation on narendra modi
आरोपों को नकारते हुए शीला दीक्षित 
वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कुछ महीने पहले गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी द्वारा रिश्वत खाने का आरोप लगाया था. आयकर विभाग द्वारा छापेमारी के दौरान पाए गए कुछ डायरी नोट और कंप्यूटर एंट्रीज को आधार मानकर उन्होंने सहारा एवं बिड़ला परिवार से रिश्वत खाने का आरोप लगाया था. परंतु माननीय सर्वोच्च न्यायलय ने इसे सबूत मानने से इनकार करते हुए उन्हें और प्रमाण पेश करने के लिए वक़्त दिया था. परंतु वे कोई नया दस्तावेज नहीं पेश कर पाए, इस पर सर्वोच्च न्यायलय के माननीय न्यायाधीशों ने उन्हें फटकार भी लगाई और सुनवाई की अगली तारिख ११ जनवरी निश्चित कर दी.

इन्ही दस्तावेजों को आधार बनाकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने डेढ़ महीने पहले उसी तथ्यहीन आरोपों का इस्तेमाल प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी को बदनाम करने के लिए करना शुरू कर दिया। अपनी राजनैतिक जमीन खोने के डर से बेहाल कोंग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने भी फिर से उसी पुराने आरोप को पेश कर दिया। उन्होंने यह कहा था की जब मैं बोलूंगा तो भूचाल आ जायेगा, परंतु खोदा पहाड़ निकली चुहिया। उनके पास कोई नए तथ्य नहीं थे और वही पुराने घिसे पीटे बेबुनियाद आरोप जड़ दिये।

इस बचकानी हरकत से राहुल गाँधी की ही जग हसाई हुई; वैसे भी लोगों ने उन्हें गंभीरता से लेना बंद कर दिया है. परंतु इससे भी बड़ी मुश्किल उनके लिए  कोंग्रेस पार्टी की वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार शीला दीक्षित ने कड़ी कर दी है. जिन दस्तावेजों के आधार पर नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाए जा रहे हैं उन्ही में शीला दिक्षीत का भी नाम है और उन्होंने इसे आधारहीन दस्तावेज बताया है. इसका अर्थ ये हुआ की जिन दस्तावेजों को राहुल गाँधी प्रामाणिक बता रहे हैं उन्ही दस्तावेजों को शीला दीक्षित आधारहीन बता रहीं हैं.

राहुल गाँधी अपने आधारहीन आरोपों और बेबुनियाद बातों के कारण जनमानस में अपनी विश्वसनीयता और प्रासंगिकता खोते जा रहे हैं. अभी दो दिन पहले ही नोटबंदी को ९९% गरीब जनता पर आघात कह कर वे फंस चुके हैं. भारत की जनता यह पूछ रही है की राहुल गाँधी, ९९% गरीबी का जिम्मेदार कौन? उन्हें कुछ भी बोलने से पहले खासकर नरेंद्र मोदी जैसे कर्मठ, जुझारू एवं लोकप्रिय नेता पर ऊँगली उठाने से पहले कई बार सोच लेना चाहिए।

सादर,
संयोजक, जयपुर संभाग,
प्रभारी, पश्चिम बंगाल,

#नरेंद्रमोदी #शीलादीक्षित #कोंग्रेस #उपाध्यक्ष #राहुलगाँधी #आरोप 

Sunday, 25 December 2016

राहुल गाँधी, ९९% गरीबी का जिम्मेदार कौन?


भारत में ९९% गरीबी का जिम्मेदार कौन? राहुल गाँधी खुद जवाब दे.  कोंग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गाँधी आजकल कह रहे हैं की नोटबंदी में ९९ प्रतिशत गरीबों को नुक्सान और एक प्रतिशत अमीरों को फायदा हुआ है. यदि देश में आज भी निन्यानवे प्रतिशत जनता गरीब है तो इसका जिम्मेदार कौन है? क्या भारत की जनता या शासक?
और सभी जानते हैं की  स्वतंत्रता के बाद सबसे ज्यादा शासन किसने किया है?

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी 
आज़ादी के बाद के ६९ वर्षों में से कोंग्रेस ने ५४ वर्ष तक देश में साहसं किया है. इनमे से बहुत बड़े समय तक राज्यों में भी कोंग्रेस की ही सरकार रही है. सबसे बड़ी बात ये है की कोंग्रेस के शासन काल के अधिकांश समय नेहरू-गाँधी परिवार का ही प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शासन रहा है. इस लिए यदि देश में आज भी निन्यानवे प्रतिशत लोग गरीब हैं तो इसकी जिम्मेदारी उनकी पार्टी और उनके परिवार को ही लेनी पड़ेगी. राहुल गाँधी को अपने परिवार और पार्टी की बिफलता की जिम्मेदारी लेनी ही चाहिए.

भ्रष्टाचार व रिश्वतखोरी 
स्वतंत्रता के बाद सबसे पहले पंडित जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री बने, वे राहुल गाँधी के पिता राजीव गाँधी के नाना थे. १९४७ से १९६४ में अपनी मृत्यु तक वे ही देश के प्रधान मंत्री रह. उनका कार्यकाल १७ वर्षों का रहा. उनकी मृत्यु के बाद लालबहादुर शास्त्री १९६४ से १९६६ के बीच डेढ़ साल के लिए प्रधान मंत्री बने और छोटे समय में बड़ा काम किया। यद्यपि वे कोंग्रेस के ही थे परंतु नेहरू- गाँधी परिवार का नही होने के कारन कोंग्रेस ने ही उन्हें भुला दिया।

शास्त्री जी की असामयिक एवं रहस्यमय मृत्यु के बाद पंडित नेहरू की बेटी और राहुल गाँधी की दादी इंदिरा गाँधी भारत की प्रधान मंत्री बानी और १९६६ से १९७७, ग्यारह साल तक एकछत्र राज किया। इस बीच १९७६ में उन्होंने १९ महीने के लिए देश को आपातकाल की आग में झोंक दिया।  उसके बाद १९७७ में हुए आम चुनाव में इंदिरा गाँधी और उनकी कोंग्रेस पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा और मोरारजी देसाई देश के पहले गैरकोन्ग्रेसि प्रधानमंत्री बने. परंतु मात्र ढाई साल में ही उनकी सरकार को गिरा कर १९७९ में कोंग्रेस ने चौधरी चरण सिंह को देश का प्रधान मंत्री बना दिया। परंतु उनका कार्यकाल कुछ ही महीनों का रहा और फिर से इंदिरा गाँधी देश की प्रधान मंत्री बन गइं.

१९८० से १९८४ में अपनी मृत्यु तक वे ही प्रधान मंत्री रहीं और उसके बाद उनके बेटे और जवाहर लाल नेहरू के दोहिते राजीव गाँधी प्रधान मंत्री बने. राहुल गाँधी उन्ही राजीव गाँधी के बेटे हैं. १९८४ से १९८९ तक राजीव गाँधी प्रधान मंत्री रहे और उसके बाद के दो वर्षों में विश्वनाथ प्रताप सिंह और फिर चंद्रशेखर (कोन्ग्रेस्स के सहयोग से) देश के प्रधान मंत्री रहे. १९९१ में नरसिम्हा राव नेहरू-गाँधी परिवार के बहार के व्यक्ति के रूप में कोंग्रेसी प्रधान मंत्री बने और १९९६ तक पांच वर्ष इस पद पर बने रहे.

१९९६ से १९९८ तक अस्थिरता के दौर में देश ने दो वर्षों में तीन प्रधान मंत्री देखे अटल विहारी वाजपेयी, एच डी देवगौड़ा और इंद्रकुमार गुजराल। १९९८ से २००४ तक देश को पहला गैर कोंग्रेसी प्रधान मंत्री मिला जिसने अपना एक कार्यकाल पूरा किया और वो थे अटल विहारी वाजपेयी।

२००४ में संप्रग सरकार बानी जिसका नेतृत्व मनमोहन सिंह ने २०१४ तक किया। इस समय सत्ता की कुंजी पूरी तरह से राहुल गाँधी की माता सोनिया गाँधी के हाथ में थी. २०१४ में कोंग्रेस की करारी हार के बाद ही नरेंद्र मोदी देश के प्रधान मंत्री बने और पिछले ढाई वर्षों से देश को विकास की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं.

नोटबंदी के बाद उत्पन्न स्थिति का राजनैतिक फायदा उठाने के लिए राहुल गाँधी ने जो बयां देना शुरू किया वह अब उनकेही गले की फांस बनने जा रहा है. बगैर काम किये केवल आरोपों की राजनीती अब चलनेवाली नहीं है. ऊपर लिखे हुए तथ्य यह बताते हैं की राहुल गाँधी के अपने ही परिवार ने ३७ वर्ष तक भारत में राज किया है; नेहरू ने १७ साल, इंदिरा ने १५ साल और राजीव ने ५ साल. इसके अलावा १० वर्ष मनमोहन सिंह के जोड़ लें जिसमे अप्रत्यक्ष रूप से सोनिया गाँधी का ही राज था तो यह आंकड़ा ४७ वर्षों का होता है. ६९ वर्षों में से ४७ वर्ष अर्थात दो तिहाई समय तो राहुल गाँधी के परिवार को ही मिला। इसमें अन्य कांग्रेसी प्रधानमंत्रियों का कार्यकाल जोड़ लें तो यह ५४ वर्ष होता है.  देश की अन्य सभी पार्टियों ने मिल कर भी अब तक केवल १५ वर्ष से भी काम शासन किया है.

अतः विचारणीय बिंदु यह है की यदि आज भी देश में निन्यानवे प्रतिशत (९९%) जनता गरीब है तो इसका जिम्मेदार कौन है? क्या नरेंद्र मोदी, अटल विहारी वाजपेयी या भाजपा? निश्चित रूप से नहीं। इसका दायित्व तो कोंग्रेस और खास कर नेहरू-गाँधी परिवार पर ही जाता है जो आज़ादी के बाद अधिकांश समय देश की सत्ता में रही. कालाधन और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का श्रेय भी इन्ही को जाता है जो हमेशा भ्रष्टाचार के विरोध में तो बोलते रहे पर अंदर ही अंदर उसे बढ़ावा भी देते रहे.  राहुल गाँधी को सलाह है की कुछ भी बोलने से पहले अपने गिरेवां में झांक कर देख लें बर्न ऐसे बयां तो उन्ही पर पलटवार करेंगे.

सादर,
संयोजक, जयपुर संभाग,
प्रभारी, पश्चिम बंगाल,

#राहुल गाँधी, #गरीबी #जिम्मेदार #नोटबंदी, #नरेंद्र मोदी #अटल #विहारी #वाजपेयी #नेहरू-गाँधी #परिवार


Thursday, 7 April 2016

नवरात्री पर्व एवं नवदुर्गा के मन्त्र




शक्ति का एक रूप सरस्वती देवी 
नवरात्री पर्व एवं नवदुर्गा के मन्त्र 

भारत में शक्ति पूजा की परंपरा रही है एवं सनातन धर्म के अनुयायी वर्ष में दो बार (चैत्र एवं आश्विन)  शक्ति उपासना के लिए ९ दिन तक व्रत एवं उपासना करते हैं. कल आठ अप्रैल चैत्र शुक्ल एकम से चैत्र नवरात्री प्रारम्भ हो रहा है. साथ ही कल भारतीय नववर्ष का प्रारम्भ भी हो रहा है.

नवरात्री पर्व पर भक्त गन नवदुर्गा अर्थात शक्ति के ९ रूपों की पूजा, आराधना आदि करते हैं. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी नव दिनों तक उपवास कर नवरात्री व्रत करते हैं और अपनी अमरीका यात्रा के दौरान भी यह व्रत रख कर उन्होंने पुरे विश्व को चौंका दिया था.

  इन नवदुर्गाओं के नाम क्रमशः इस प्रकार है जिनकी एकम, दूज, तीज, से लेकर नवमी तक उपासना की जाती है.  १.  श्री  शैलपुत्री  २. श्री व्रह्मचारिणी  ३.  श्री चन्द्रघण्टा  ४. श्री कुष्मांडा   ५. श्री स्कन्दमाता   ६. श्री कात्यायनी   ७.  श्री कालरात्री  ८.  श्री महागौरी   ९. श्री सिद्धिदात्री

इन नवदुर्गाओं के जप मन्त्र इस प्रकार हैं जिन्हे ९ दिनों में क्रमशः जप किया जाता है.

 १.  ॐ ह्रीं श्री शैलपुत्री दुर्गायै नमः
 २.  ॐ ह्रीं श्री व्रह्मचारिणी दुर्गायै नमः
 ३.  ॐ ह्रीं श्री चन्द्रघण्टा  दुर्गायै नमः
 ४. ॐ ह्रीं श्री कुष्मांडा  दुर्गायै नमः
 ५. ॐ ह्रीं श्री स्कन्दमाता  दुर्गायै नमः
 ६. ॐ ह्रीं श्री कात्यायनी  दुर्गायै नमः
 ७. ॐ ह्रीं श्री कालरात्री दुर्गायै नमः
 ८. ॐ ह्रीं श्री महागौरी  दुर्गायै नमः
 ९. ॐ ह्रीं श्री सिद्धिदात्री दुर्गायै नमः

कन्हैया लाल एवं रोहित बेमुला विमर्ष



Friday, 25 September 2015

संयुक्त राष्ट्रसंघ में नरेंद्र मोदी ने दिया हिंदी में भाषण



Indian Prime Minister Narendra Modi addressing at UN general Assembly

Prime Minister Narendra Modi addresses the 69th session of the UN General Assembly

Prime Minister Narendra Modi meets Ban Ki-moon at the UN headquarters

Prime Minister Modi meets Ban Ki-moon at the UN headquarters


देश को पुनः गौरवान्वित करते हुए संयुक्त राष्ट्रसंघ में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज फिर हिंदी में भाषण दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा आयोजित सतत विकास सम्मलेन को संवोधित कर रहे थे. भारतीय समयानुसार रात १० बज कर ४० मिनट पर जब वे बोलने के लिए आये तब पूरी सभा तालियों की गूंज से गड़गड़ा उठी. पूरा विश्व उनके वक्तव्य को सुनने के लिए उत्सुक था.

महात्मा गांधी के उल्लेखपूर्वक उन्होंने अपना भाषण प्रारम्भ किया एवं सतत विकास व गरीबी उन्मूलन के अपने लक्ष्य को पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद के आदर्श से भी जोड़ा। उन्होंने कहा की विश्व में १,३ अरब लोग गरीब हैं और भारत में गरीबी उन्मूलन उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.

गरीबी उन्मूलन एवं अंतिम व्यक्ति को भी अर्थनीति की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार द्वारा किये गए उपायों का भी व्योरा दिया। उन्होंने आगे कहा की एक वर्ष में ही १८ करोड़ व्यक्तियों का नया बैंक खता खुलवा कर उनकी सरकार ने इस दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है जिसे जन धन योजना के नाम से जाना जाता है.

 गरीबों के लिए बीमा योजना, किसानो के लिए सरकार द्वारा उठाये गए कदम, महिला सशक्तिकरण, दक्षता विकास आदि की भी जानकारी दी. विशेषरूप से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की बात भी की. उन्होंने विकसित देशों से आग्रह किया की पर्यावरण संरक्षण के लिए ईमानदारी से काम करते हुए वे अपना अंशदान करें। उन्होंने आगे कहा की पर्यावरण संरक्षण में प्राकृतिक आपदाओं से गरीबों को बचने का दृष्टिकोण भी सम्मिलित होना चाहिए.

अपने भाषण में उन्होंने एक महत्वपूर्ण बात की और सबका ध्यान आकर्षित किया। भारतीय महासागर से लेकर अटलांटिक एवं प्रशांत महासागरीय द्वीपों के बीच महत्वपूर्ण साझेदारी एवं उनके विकास के लिए भारतीय प्रतिवद्धता को भी दोहराया।

एक अत्यंत महत्वपूर्ण आर्थिक नीति की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा की पुरे विश्व में दो ही तरह के उद्योगों की चर्चा होती है पब्लिक एवं प्राइवेट जबकि उनकी सरकार एक तीसरी श्रेणी के लिए पहल कर रही है और वो है पर्सनल। व्यक्तिगत उद्यमियों को प्रोत्साहन देने के लिए उनकी सरकार बड़े पैमाने पर प्रयत्न कर रही है.

संयुक्त राष्ट्रसंघ के पुनर्गठन पर वाल देते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा की इसकी स्थापना के ७० साल बाद यह बहुत आवश्यक हो गया है इसके बिना इसकी भूमिका प्रभावी नहीं हो सकती। अंत में सबके कल्याण की कामना करने भावना के साथ सबको धन्यवाद देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना वक्तव्य समाप्त किया।

II सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः सर्वे भद्राणि पश्यन्तु माँ कश्चिद दुःख भाग भवेत् II

Jyoti Kothari
Convener, Jaipur division
Prabhari, West Bengal,
Narendra Modi Vichar Manch

Picture courtesy 1.  By Narendra Modi [CC BY-SA 2.0 (http://creativecommons.org/licenses/by-sa/2.0)], via Wikimedia Commons

Picture courtesy 2. By Narendra Modi (PM meets Ban Ki-moon at the UN headquarters) [CC BY-SA 2.0 (http://creativecommons.org/licenses/by-sa/2.0)], via Wikimedia Commons

Sunday, 14 September 2014

नरेंद्र मोदी, सेना, अलगाववादी एवं जम्मू कश्मीर में बाढ सहायता


Prime Minister Modi at a meeting in Jammu and Kashmir to assess flood situation
नरेंद्र मोदी - जम्मू कश्मीर में बाढ की स्थति पर उच्चस्तरीय वार्ता
७ सितम्बर २०१४ 
(By Narendra Modi [CC-BY-SA-2.0 (http://creativecommons.org/licenses/by-sa/2.0)], via Wikimedia Commons)

नरेंद्र मोदी एवं जम्मू कश्मीर में बाढ की स्थिति बेहद ख़राब है. ११३ वर्षों में इस राज्य में ऐसी हालत हुई है। पुरे राज्य विशेष कर घाटी की हालत नाजुक है. लाखों लोग बढ़ की चपेट में आये हैं और काम से काम चार लाख लोगों को बाहर निकलने की आवश्यकता थी।  हमारे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जापान यात्रा से वापस लौटते ही स्वयं कश्मीर गए एवं वहां की स्थिति का जायजा लिया।

अपनी कार्यशैली के अनुरूप ही उन्होंने तत्काल राज्य को एक हज़ार करोड़ की सहायता राशि का ऐलान किया। इतना ही नहीं तत्काल ही भारतीय थलसेना, वायुसेना यहाँ तक की नौसेना को भी पीड़ितों की सहायता के लिए नियुक्त कर दिया। भारतीय सेना के ये जांबाज भी तत्काल मुस्तैदी के साथ राहत एवं बचाव कार्य में जुट गए.

सेना के इन जवानो ने अब तक एक लाख तीस हज़ार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानो तक पंहुचा दिया है।  इसके लिए वासी सेना के हेलीकॉप्टरों का भी उपयोग किया जा रहा है।  चार सौ से अधिक्  हेलीकोप्टर इस काम में रात दिन लगे हुए हैं.  लोगों को बचने के आलावा ये रहत सामग्री भी गिरा रहे हैं. सेना के साथ साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी कश्मीरियों की सहायता के लिए घर घर जा कर धन संग्रह कर रहा है एवं रहत कार्य में जूट गया है।

भारत सरकार एवं गुजरात सहित अन्य प्रांतीय सरकारों ने सहायता के रूप में भोजन सामग्री, कम्बल आदि भेजे हैं उन्हें सेना के जवानो द्वारा जरूरतमंदों तक पहुंचाया जा रहा है. मोदी जी के निर्देश पर सेना द्वारा किये जा रहे इस कार्य की भूरि भूरि प्रसंशा हो रही है. मोदी जी के घोर विरोधी दिग्विजय सिंह जैसे कोंग्रेसी नेता एवं अरविन्द केजरीवाल जैसे  भी उनकी प्रशंषा के लिए मज़बूर हो गए हैं।  हमेशा उन्हें मुसलमानो का विरोधी बताने वालों के मुह में भी ताला लग गया है. गौरतलब है की कश्मीर मुस्लिम बहुल राज्य है जहाँ से हमेशा अलगाववादी स्वर उठते रहते हैं.

हमेशा सेना एवं भारत सरकार के विरोध में बोलनेवाले पाकिस्तान परस्त हुर्रियत कॉन्फ्रेंस, जे के एल ऍफ़ जैसे अलगाववादी एवं आतंकवादी संगठन कश्मीरियों को सहायता पहुचने में कही दूर दूर तक नज़र नहीं आ रहे हैं.

आज कश्मीरियों को समझ में आ रहा है की ये भावनाएं भड़काने लोग उनके सच्छे हितैषी नहीं हैं वल्कि नरेंद्र मोदी एवं सेना जिनके खिलाफ हमेशा उन्हें भड़काया जाता रहा है, वे ही मुसीबत के समय एक सच्चे दोस्त की तरह उनके काम आ रहे हैं. हालाँकि अभी भी सेना के जवानो पर पत्थर फेंकने से वे बाज नहीं आ रहे हैं  ने स्पष्ट कर दिया है की इन शरारती तत्वों के कारन वे रहत कार्य बंद नहीं करेंगे एवं पीड़ित कश्मीरियों को सहायता करते रहेंगे।

इस वीच बारात सरकार की संस्था एयर इंडिया ने वहां फंसे सैलानियों को बहार लाने के लिए मुफ्त सेवा  का ऐलान कर दिया है एवं VSNL ने सात दिन तक मुफ्त मोबाइल सेवा देने की घोषणा की है. भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ट्वीट कर समर्थकों से उनका जन्मदिन समारोह नहीं मानाने की अपील की है. उन्होंने कहा है की समारोह में व्यय होनेवाले धन एवं समय को बाढ़ पीड़ितों की सहायता में लगाया जाये।

नमामि गंगे, वाराणसी

प्रधान मंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के सौ दिन

मैं भारत का प्रधान सेवक बोल रहा हूँ : लालकिले से नरेंद्र मोदी

Jyoti Kothari

Convener, Jaipur division
Prabhari, West Bengal,
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Tuesday, 27 May 2014

अच्छे दिन आ गए हैं मोदी के शपथ ग्रहण से ही शुरू हो गया काम


Oath PM of India, Narendra Modi, May26, 2014
नरेंद्र मोदी प्रधान मंत्री पद की शपथ लेते हुए 
श्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण से ही काम करना शुरू हो गया. सात देशोंके राष्ट्राध्यक्ष या उनके प्रतिनिधियों से बातचीत हो गई।  मोदीने बता दिया की वो काम करना चाहते हैं और काम करना जानते हैं. एक कहावत है की "बड़े आदमी कोई अलग काम नहीं करते परन्तु काम को अलग तरीके से करते हैं". नमो ने अपने पहले ही दिन ऐसा कर दिखाया।

सामान्यतः किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष की यात्रा तय होने में तीन से चार महीने का समय लग जाता है. यदि अन्य कोई प्रधान मंत्री बनते तो शपथ ग्रहण के कई महीनो बाद विदेश विभाग विदेशी मेहमानो को बुलाने की तैयारी करता और तीन चार महीने की मशक्कत के बाद कार्यक्रम तय होता परन्तु मोदीजी ने ऐसे समय उन्हें न्योता दिया की यही काम आनन फानन में हो गया. इसे ही कहते हैं आम के आम गुठली के दाम.

पाकिस्तान, श्रीलंका, मालदीव, भूटान, नेपाल, मौरिसस एवं बांग्लादेश के प्रतिनिधियों ने कल शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत की एवं भारत के नए प्रधानमंत्री से बातचीत भी. इससे जहाँ समारोह का गौरव बढ़ा वहीँ द्विपक्षीय सम्वन्ध भी मजबूत हुए.

पाकिस्तान, जिसके साथ बहुत ही तनावपूर्ण सम्वन्ध रहे हैं, ने सद्भावना के रुप में सौ से अधिक भारतीय मछुवारों को मुक्त कर भारत लौटा दिया। इसी प्रकार श्री लंका ने भी कुछ तमिल मछुवारों को रिहा कर दोस्ती का संकेत दिया। पाकिस्तान के प्रधान मंत्री नवाज़ शरीफ ने कट्टरवादियों के विरोध को दरकिनार कर भारत आना पसंद किया।

श्री नरेंद्र मोदी ने अपने चुनावी सभाओं में कहा था की न आँख झुका कर बायत करेंगे न आँख दिखा कर परन्तु आँख मिला कर बात करेंगे। उन्होंने ऐसा ही किया। नवाज़ शरीफ से वार्ता में उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा की पाकिस्तान आतंकवादियों के खिलाफ सख्त कार्रवाही करे. २६/११ के अपराधियों के खिलाफ कार्यवाही में तेज़ी लाए.

इसके साथ ही सभी सात सार्क देशों के साथ व्यापार बढ़ने पर भी वल दिया गया. सार्क देशों के साथ व्यापार बढ़ाकर चीन की व्यापारिक चुनौतियों का सामना किया जा सकता है. इस तरह से नरेंद्र मोदी ने अपने प्रधान मंत्रित्व काल के प्रथम दिन ही विदेश, राजनैतिक एवं आर्थिक मोर्चे पर बड़ी पहल कर दी. भारत के विकास एवं उन्नति के लिए इसी प्रकार डट कर काम करने की आवश्यकता है. १० वर्षों के ढीले ढाले प्रशाशन के बाद ऐसा दिन देख कर बहुत शकुन मिलता है और लगता है की अच्छे दिन आ गए हैं.

धन्यवाद,
ज्योति कोठारी,
संयोजक, जयपुर संभाग,
प्रभारी, पश्चिम बंगाल
नरेंद्र मोदी विचार मंच 


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