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Monday, 4 July 2016

बेलगाम वाहन चालकों को हो कड़ी सजा


Death in road accident in India
सड़क दुर्घटना में मृत्यु 

Injured and hospitalized in road accident in India
सड़क दुर्घटना में घायल 

बेलगाम वाहन  चालकों को कड़ी सजा होनी चाहिए। सड़क दुर्घटना से होनेवाले मौतों को कम करने के लिए यह कदम उठाना अति आवश्यक है.  सड़क दुर्घटनाओं में मरनेवालों की संख्या पुरे विश्व में भारत में ही सर्वाधिक है. अभी देखा जाता है की आये दिन कोई न कोई बेलगाम ट्रक, बस, गाडी या मोटर बाइक चालक किसी न किसी राहगीर को कुचल कर चला जाता है. पीड़ित व्यक्ति की या तो मौत हो जाती है या वो गम्भीर रूप से घायल हो जाता है.

भारत में गतिसीमा से अधिक पर वाहन चलाने से जुर्माना भरना पड़ता है. सामान्यतः शहरों में दुपहिया वाहन के लिए ४० एवं चार पहिया वाहन के लिए ६० किमी प्रति घंटे की रफ़्तार निश्चित है. इससे तेज गति से वाहन चलाने पर प्रायः ट्रैफिक पुलिस द्वारा चालान किया जाता है. ऐसी स्थिति में वाहन चालक या तो कुछ रिश्वत ले-दे के या फिर जुरमाना भर के बरी हो जाता है. यहाँ ख़ास बात ये है की कोई दुपहिया वाहन चालक ४० से ऊपर ४५ पर चलाये या ९० की गति से जुरमाना एक ही होता है. कणों के इस प्रावधान  में संशोधन होना चाहिए.

मान लीजिए किसी ने गति सीमा से कुछ अधेिक गति से वाहन चलाया तो उससे सामान्य जुरमाना, ज्यादा तेज चलाने पर कुछ अधिक जुर्माना और खतरनाक गति से चलाने पर कठोर दण्ड का प्रावधान होना चाहिए। आमतौर पर खतरनाक गति से चलने वाले वाहन ही दुर्घटना और मौत का कारन बनते हैं. ऐसे चालकों के पकडे जाने पर लाइसेंस रद्द/ क़ैद जैसी सजा होनी चाहिए केवल जुर्माना भरना पर्याप्त नहीं।

प्रायः ये भी देखा गया है की खतरनाक गति से चलनेवाले वाहन पुलिस को धता बता कर चले जाते हैं परन्तु कानून का मामूली उल्लंघन करनेवाले पकडे जाते हैं और जुर्माना भरते हैं. इस स्थिति में परिवर्तन होना चाहिए। इसके साथ ही नाबालिगों द्वारा एवं बिना लाइसेंस वाहन चलाने पर भी कठोर निगरानी एवं सजा का प्रावधान होना चाहिए। लाइसेंस देने के तरीके को भी भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की जरुरत है जिससे वास्तव में वाहन चलाना आने पर एवं ट्रैफिक नियमों की जानकारी होने पर ही लाइसेंस दिया जाए. ओवरलोडिंग पर भी कठोर कार्यवाही होनी चाहिए

आर्थिक प्रगति के लिए शिक्षा जरुरी साक्षरता नहीं


Suggestions to PMO 9: Jobs in Organized sector vs Unorganized sector in India

सादर,
ज्योति कोठारी,
संयोजक, जयपुर संभाग,
प्रभारी, पश्चिम बंगाल,
नरेंद्र मोदी विचार मंच

Wednesday, 29 June 2016

सातवें वेतन आयोग से बढ़ेगी महंगाई और बेरोजगारी


Endless hunger of government employees #7thpaycommission

सरकारी कर्मचारियों की बढ़ती भूख  
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी दे दी है. इस के असर से महंगाई और बेरोजगारी बढ़ेगी। केंद्रीय कर्मचारियों का वेतन औसतन २३.५ फ़ीसदी बधाई गई है. इससे केवल ४७ लाख वर्त्तमान एवं ५२ लाख पूर्व कर्मचारियों को लाभ होगा जबकि इसका भर देश की १२५ करोड़ जनता को उठाना पड़ेगा। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागु करने से केंद्र सरकार पर 1लाख २ हज़ार करोड़ रुपये का अतिरिक्त सालाना बोझ पड़ेगा, और यह रकम जनता से वसूले हुए टैक्स में से जायेगा।

Report 7th Pay commission 1

Report 7th Pay commission 2
इसका एक पहलु ये भी है की विकास के काम में कमी होगी। देश का वीकास अवरुद्ध होगा और GDP विकास दर में भी कमी आएगी। दुसरी ओर इससे मुद्रास्फीति बढ़ेगी जिसका अनिवार्य परिणाम महंगाई के रूप  में आएगा। साथ ही मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी के कारण व्याज दरें या तो  बढ़ेगी या स्थिर रहेगी; व्याज दर नहीं घटने से उद्योग-व्यापर के लिए क़र्ज़ महंगा होगा और उनके विकास दर में भी कमी आएगी। जिससे बेरोजगारी बढ़ेगी।

इसका एक दूसरा पहलु ये भी है है राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए सरकार नई नियुक्ति नहीं करेगी और इससे भी बेरोजगारी बढ़ेगी।  केंद्रीय  वेतन बढ़ने पर राज्य सरकारों में भी वेतन बढ़ने  होगी और यह दुष्चक्र फिर से तेज गति से चलेगा।

सरकारी कर्मचारियों का वेतन वैसे भी अन्य निजी कर्मचारियों की तुलना में लगभग दुगुना है. यदि असंगठित क्षेत्र की बात करें तो यह लगभग चार से पांच गुना है. वेतन के अलावा अन्य भत्ते, छुट्टियां एवं अन्य सुविधाएँ इसके अतिरिक्त है. ऐसी स्थिति में सरकारी कर्मचारियों का वेतन बढ़ाना कहाँ तक वाजीव है?

पांचवें वेतन आयोग ने 52प्रतिशत और छठे वेतन आयोग  वीस प्रतिशत वेतन वृद्धि की थी. उस समय कर्मचारी संगठनों ने तत्कालीन सरकार पर दवाव डालकर इसे चालीस प्रतिशत करवा लिया था. इस तरह दोनों वेतन आयोगों का मिलाकर कुल वृद्धि ११३ प्रतिशत हो गई थी. (१००+५२ =१५२ +४०%= २१३). इस पर २३.५ प्रतिशत जोड़ने पर यह हो जाता है २६३ अर्थात १६३ प्रतिशत की वृद्धि!!!  यह नियमित वेतन वृद्धि एवं महंगाई भत्ते के अतिरिक्त है. अर्थात सरकारी कर्मचारियों को महंगाई का असर नहीं होता और ऊपर से इतनी ज्यादा वृद्धि दर!! हर सरकार लगातार सरकारी कर्मचारियों के आगे झुकती रही है और जनता जागरूक नहीं हुई तो आगे भी झुकती रहेगी। सबसे बड़ी बात ये है सरकारी कर्मचारी इस बढ़ोतरी से भी संतुष्ट नहीं हैं और हड़ताल पर जाने की धमकी दे रहे हैं.

सामान्य जनता तो सरकारी कर्मचारियों के रवैय्ये से वैसे ही नाखुश है, उन्हें लगता है की वे काम तो कम करते हैं और वेतन-सुविधाएँ अधिक लेते हैं. अब जनता को ही जागरूक हो कर इस प्रवृत्ति का मुखर विरोध करना होगा और अपने जन-प्रतिनिधियों को इसके विरुद्ध संसद और विधान सभाओं में आवाज उठने के लिए मजबूर करना होगा।

आर्थिक प्रगति के लिए शिक्षा जरुरी साक्षरता नहीं


Suggestions to PMO 9: Jobs in Organized sector vs Unorganized sector in India

सादर,
ज्योति कोठारी,
संयोजक, जयपुर संभाग,
प्रभारी, पश्चिम बंगाल,
नरेंद्र मोदी विचार मंच

फोटो: By மா.ராஜ் (Own work) [CC BY-SA 4.0 (http://creativecommons.org/licenses/by-sa/4.0)], via Wikimedia Commons

Tuesday, 28 June 2016

आर्थिक प्रगति के लिए शिक्षा जरुरी साक्षरता नहीं


जी हाँ, आर्थिक प्रगति के लिए शिक्षा जरुरी है साक्षरता नहीं। शिक्षित व्यक्ति अपनी आय का साधन बढ़ा सकता है और आये हुए धन को सहेज कर अमीर भी बन सकता है परन्तु केवल साक्षर व्यक्ति ये काम नहीं कर सकता। यहाँ शिक्षा और साक्षरता का अंतर समझना बहुत जरुरी है. शिक्षा का अर्थ है किसी उपयोगी कल को सीखना जबकि साक्षरता केवल मात्र अक्षर ज्ञान है.

मध्यप्रदेश की ग्रामीण महिलाएं दक्षता विकास कार्यक्रम में मुस्कराते हुए 
अंग्रेजों ने बड़ी चालाकी से शिक्षा को साक्षरता का पर्यायवाची बन दिया था. प्राचीन काल से ही भारत में शिक्षा पर जोर था और यहाँ के व्यक्ति ज्ञान विज्ञानं के क्षेत्र में काफी प्रगति कर चुके थे. इसी कारण उस समय भारत आर्थिक रूप से भी बहुत समृद्ध था. परन्तु उस समय लिखने और पढ़ने पर बहुत जोर नहीं था. वेद, जैन आगम और बौद्धों का त्रिपिटक, जो की ज्ञान विज्ञानं का खजाना था उन्हें हज़ारों वर्षों तक लिखा नहीं गया था, उन्हें कंठस्थ किया जाता था.

जब अंग्रेजो ने भारत पर अधिकार किया तब उन्हें लगा की शिक्षित और आर्थिक रूप से समृद्ध इस देश को ज्यादा दिन गुलाम बनाए रखना संभव नहीं। इसलिए उन्होंने एक चाल चली. "शिक्षा" को "साक्षरता" में बदल दिया, और इस प्रकार भारत की अधिकांश शिक्षित जनता निरक्षर घोषित हो गई. अंग्रेजों ने साक्षरता को बढ़ावा दिया, उन्हें अच्छी नौकरी दी और गुलामों की फौज तैयार कर दी. वास्तविक शिक्षित व्यक्ति का सन्मान नष्ट हो गया. उसके साथ ही भारत की आर्थिक प्रगति भी रुक गई और एक बेहद समृद्ध देश गरीबी के गर्त में समां गया.

Narendra Modi, Rajnath Singh and Ram Naik in Lucknow
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह व राज्यपाल राम नाईक लखनऊ में दक्षता प्रमाण पत्र देते हुए 
दुर्भाग्य से स्वतंत्रता के बाद भी हम अंग्रेजों की बनाई हुई (लार्ड मैकाले) शिक्षा व्यवस्था को ही ढोते रहे और हमारे विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों ने (शिक्षित?) बेरोजगारों की फौज खड़ी कर दी. इन तथाकथित शिक्षण संस्थानों से प्रति वर्ष लगभग १ करोड़ विद्यार्थी निकलते हैं लेकिन उनमे से अधिकांश रोजगार पाए लायक नहीं होते. उन्हें साक्षर जरूर बनाया जाता है परन्तु उनमे व्यवहारीक शिक्षा का नितांत अभाव होता है. स्वयं का व्यापार करना तो दूर प्रायः वे नौकरी करने लायक भी नहीं होते.

अभी हाल में ही जारी मानव पूंजी सूचकांक (Human Capital Index) की विश्व सूचि में भारत १०५ वे स्थान पर है जो की बहुत ही नीचे की ओर है. इस सूचकांक में ऊपर की ओर बढ़ने के लिए शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता है. शिक्षा जब तक व्यवहारिक व रोजगारोन्मुखी नहीं होगी हम इस सूचकांक में अच्छा सतहन नहीं प्राप्त कर सकेंगे.

इन तथाकथित शिक्षण संस्थानों में से सरकारी संस्थानों में जनता की गाढ़ी कमाई का खरबों रूपया बर्बाद होता है और निजी शिक्षण संस्थायें एवं कोचिंग इंस्टिट्यूट खरबों रुपये का व्यापारी लाभ कमाती है. इससे भी बड़ी बीमारी ये है की अधिकांश माता-पिता डिग्री एवं नंबरों के मोह में पड़ कर अपना पैसा और बच्चों का भविष्य बर्बाद कर देते हैं.

डिग्री और नंबर के मोह में पड़े बिना यदि इन छात्रों को व्यवहारिक, जीवनोपयोगी, एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा दी जाये तो उनमे कार्यकुशलता बढ़ेगी और अच्छा रोजगार मिलेगा। उनमे व्यावसायिक दक्षता का विकास होगा। उनमे से ही उद्यमी, प्रवन्धक, व्यापारी आदि निकलेंगे और वे अन्य युवाओं को नौकरी भी देंगे। इस तरह से देश आर्थिक प्रगति की राह पर तेजी से आगे निकलेगा।

एंड्राइड एप्लिकेसन डेवलपमेंट में अपार सम्भावनाएं


सादर,
ज्योति कोठारी,
संयोजक, जयपुर संभाग,
प्रभारी, पश्चिम बंगाल,
नरेंद्र मोदी विचार मंच

चित्र १: By McKay Savage from London, UK (smiles and determination of rural Indian women #1) [CC BY 2.0 (http://creativecommons.org/licenses/by/2.0)], via Wikimedia Commons

Sunday, 26 June 2016

NSG में भारत की राह रोकनेवाले चीन को सबक सिखाना जरूरी


NSG में भारत की राह रोकनेवाले चीन को सबक सिखाना जरूरी है. NSG अर्थात परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में कुल ४८ देश हैं जिनमे अमरीका, रूस, फ़्रांस सहित ४२ देशों ने भारत के प्रवेश का समर्थन कर दिया था. केवल चीन ने ही भारत विरोध का अपना अड़ियल रूख कायम रखा. अमरीका ने तो वाकायदा सभी सदस्य देशों को पत्र लिख कर भारत का समर्थन करने  अनुरोध किया था.


Updated map of the governments participating in the Nuclear Suppliers Group

शुरू में कुछ देश भारत का विरोध कर रहे थे परन्तु प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के बाद स्वीजरलैंड एवं मेक्सिको ने भारत का समर्थन कर दिया था. अंतिम दिन तो ऑस्ट्रिया, न्यूज़ीलैंड, तुर्की आदि देश भी नरम पड़ गए थे. परन्तु प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के अनुरोध के वावजूद चीन के राष्ट्रपति जिन पिंग ने अपना रवैय्या नहीं बदला और भारत विरोध की नीति पर कायम रहे.

NSG अर्थात परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में किसी नए राष्ट्र का प्रवेश सर्वसम्मति से ही हो सकता है और अकेले चीन के विरोध के कारण भारत इसका सदस्य नहीं बन पाया। अभी दो-तीन रोज पूर्व दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में NSG सदस्य देशों की बैठक हुई थी. दक्षिण कोरिया ने अपने मेजबान होने का फ़र्ज़ अदा करते हुए सदस्य देशों में सहमति बनाने का भरपूर प्रयास किया।

कल अमरीकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने एक बयान जरी कर कहा है की भारत को NSG की सदस्यता दिलाने के लिए अमरीका पूरा प्रयास करेगा और यह सुनिश्चित करेगा की इस वर्ष के अंत तक भारत को परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह की सदस्यता मिल जाए. यह नरेंद्र मोदी जी के कूटनीतिक प्रयासों की सफलता है.

हम भारत की जनता को भी इस प्रयास में अपनी भूमिका निभानी है और चीन को सबक सीखाना है. अर्थनीति रूप से चीन पर चोट करना है और उसके लिए चीनी सामानों का बहिष्कार आवश्यक है. यदि भारत के लोग चीनी सामान खरीदना बंद कर दें तो पहले से ही मंदी से जूझ रहे चीनी उद्योगों को भारी झटका लगेगा. उनके बहुत से उद्योग तो बंद ही हो जायेंगे ऐसी स्थिति में चीन को भारत विरोध की अपमी नीति त्यागने को मज़बूर होना पड़ेगा।

२० उपग्रह एक साथ अंतरिक्ष में भेज इसरो ने भारत को बनाया महाशक्ति


Regards,
Jyoti Kothari
Convener, Jaipur division
Prabhari, West Bengal,
Narendra Modi Vichar Manch



Wednesday, 22 June 2016

२० उपग्रह एक साथ अंतरिक्ष में भेज इसरो ने भारत को बनाया महाशक्ति


इसरो द्वारा निर्मित स्वदेशी प्रक्षेपण यान  PSLV 34
२० उपग्रह एक साथ अंतरिक्ष में भेज इसरो ने भारत को बनाया अंतरिक्ष विज्ञानं का महाशक्ति। भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान परिषद (इसरो) ने आज श्रीहरिकोटा में PSLV 34 प्रक्षेपण यान से एक साथ २० उपग्रहों को पृथ्वी से ५५० किलोमीटर दूर अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित किया.  इससे पूर्व अमरीका ने २०१३ में एक साथ २९ एवं रूस ने २०१४ में एक साथ ३३ उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजा था. इस तरह सर्वाधिक उपग्रहों को एक सात भेजने के मामले में भारत दुनिया का तीसरा देश बन गया है. गौरतलब है की ब्रिटेन, फ़्रांस, जापान, जैसे विकसित देश और भारत को लगातार घेरने की कोशिश में लगा चीन भी इस मामले में भारत से काफी पीछे है.

आज जिन उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेज गया उनमे से १३ अमरीका के, इंडोनेशिया, जर्मनी, आदि देशों के ४ और भारत के ३ उपग्रह शामिल हैं. अमरीकी सैटेलाइटों में से एक गूगल का भी है. भारतीय उपग्रहों में से एक पुणे कॉलेज ऑफ़ इंजिनीरिंग के छात्रों ने बनाया है. मात्र ९९० ग्राम के इस सैटेलाइट का नाम "स्वयं" है. भारत की यह सफलता पूर्णतः स्वदेशी तकनीक पर आधारित है और इसके लिए इसरो के सभी वैज्ञानिक एवं अन्य कर्मीदल वधाई के पात्र हैं.

कृत्रिम उपग्रह निर्माण एवं प्रक्षेपण का विश्वव्यापी बाज़ार बहुत बड़ा है और भारत इसमें एक प्रमुख खिलाडी के रूप में उभरा है. इसरो द्वारा प्रक्षेपण की लगत दुनिया के अन्य देशों के मुक़ाबले मात्र १० प्रतिशत है अर्हत अन्य देशों से प्रक्षेपण कराने पर भारत से दस गुनी कीमत अदा करनी पड़ती है. अपने किफायती तकनीक के कारण इसरो विश्व बाज़ार में एक सक्षम प्रतिद्वंदी  में तेजी से उभर रहा है  अब तक ६६० करोड़ रुपये का कारोबार कर लिया है.

अंतरिक्ष अनुसन्धान के क्षेत्र में इस बड़ी कामयाबी के लिए इसरो के वैज्ञानिकों एवं सम्पूर्ण भारतवासियों को पुनः वधाई। यह कामयाबी परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत की दावेदारी को और मज़बूत करेगा और चीन को भारत विरोध त्याग करने की दिशा में कदम बढाने किदिशा में सोचना पड़ेगा।

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के विश्व महाशक्ति बनने की ओर बढ़ते कदम


Regards,
Jyoti Kothari
Convener, Jaipur division
Prabhari, West Bengal,
Narendra Modi Vichar Manch

फोटो: By Ashutoshrc (Own work) [CC BY 3.0 (http://creativecommons.org/licenses/by/3.0)], via Wikimedia Commons


Sunday, 19 June 2016

Suggestions to PMO 10- Control drugs and drugs addictions


I am writing the tenth blog in the series-Suggestions to PMO about exercising control over drugs and drugs addictions. Large numbers of Indian people are drug addicted especially the youth and young. Drugs are snatching their lives from their hands. The youth India is spending a huge amount of  money in consuming drugs. This addiction is leading them to a state of illusion and false tranquility.

Drug addicted people are unable to work properly and live a normal life. In many cases, they have a tendency to jump to criminal activities. A nexus of corrupt politicians, drug mafia, government administration and law enforcement officers are mainly responsible for the proliferation of drugs.

Say no to drugs
Narendra Modi, Prime Minister of India, is continually working hard to take India to the league of developed nations. Drugs and its addiction is a big hurdle to his mission. We request the PMO to take strong initiatives to control over drug mafia.



Regards,
Jyoti Kothari
Convener, Jaipur division
Prabhari, West Bengal,
Narendra Modi Vichar Manch

Picture: By Miran Rijavec [CC BY 2.0 (http://creativecommons.org/licenses/by/2.0)], via Wikimedia Commons

Friday, 17 June 2016

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के विश्व महाशक्ति बनने की ओर बढ़ते कदम


प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व शक्ति बनने की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है. दो वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते ही मोदी जी ने देश को विकास की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए पहले पड़ौसी देशों से सम्वन्ध सुधारे और फिर विश्व भ्रमण पर निकल पड़े. विपक्षी दलों ने उनके विदेश भ्रमण की भरपूर आलोचना की और मीडिया ने भी उनका खूब साथ दिया। परन्तु अब विदेश भ्रमण का फल दिखने लगा है. क्योंकि मोदी जी सैर-सपाटा या मौज मस्ती के लिए नहीं गए थे वल्कि वहां भी वे लगातार काम कर रहे थे.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ नरेंद्र मोदी 

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य भारत को विश्व में महाशक्ति बनाना है जिसके लिए संयुक्त राष्ट्रसंघ सुरक्षा परिषद  की स्थाई सदस्यता एवं वीटो पावर की जरुरत है. अभी अभी भारत को MTCR अर्थात मिसाइल टेक्नोलॉजी कन्ट्रोल रेजिम में सदस्यता मिली है एवं NSG अर्थात न्यूक्लियर सप्लाई ग्रुप की सदस्यता का वह प्रवल दावेदार है. गौरतलब है की चीन MTCR का सदस्य नहीं है. अमरीका, रूस, ग्रेट ब्रिटेन, फ़्रांस, जापान, आदि प्रमुख देशों ने भारत की NSG सदस्यता का प्रवल समर्थन किया है. मोदी जी की हाल की यात्रा में स्विट्जरलैंड और मेक्सिको का समर्थन भी हासिल हो चूका है. विरोध करने के कारण चीन जैसा शक्तिशाली देश भी विश्व मंच पर अलग पड़ता जा रहा है. यह भी सम्भावना है की आगामी सप्ताह होने वाली NSG की सभा में चीन भी भारत का समर्थन कर दे और हमारा देश NSG की सदस्यता प्राप्त कर ले।

MTCR और NSG दोनों की सदस्यता संयुक्त राष्ट्रसंघ सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता की दावेदारी के लिए मील का पत्थर सावित होगी। इसके बाद पकिस्तान तो क्या चीन भी भारत को आँख दिखाने का साहस नहीं कर सकता है. इसके साथ ही भारत आर्थिक मोर्चे में भी बहुत ही तेजी से आगे बढ़ रहा है. विश्व में सर्वाधिक सम्पत्तिवाले देशों में अभी कुछ ही दिनों पूर्व भारत ने इटली को पीछे छोड़ कर छठा स्थान प्राप्त किया है. भारत साढ़े सात प्रतिशत से भी ज्यादा विकास दर के साथ विश्व की सबसे तीव्र गति से आगे बढ़नेवाली अर्थव्यवस्था है।  इस मामले में उसने चीन के एकाधिकार को तोडा है.

हमें पूरा भरोसा है की  प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत जल्दी ही विश्व की प्रमुख आर्थिक एवं सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित होगा।

India Steps ahead for Veto power in United Nations



Regards,
Jyoti Kothari
Convener, Jaipur division
Prabhari, West Bengal,
Narendra Modi Vichar Manch